ग्लोबल वार्मिंग से बचने के लिए महत्वपूर्ण होंगे बाँझ और देवदार

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उत्तराखंड:ग्लोबल वार्मिंग जैसे बड़े संकट से बचने के लिए मौजूदा समय में दुनिया भर में कई तरह के शोधकार्य किए जा रहे हैं और तमाम वैज्ञानिक इस कोशिश में लगे हैं की कैसे इस संकट से उभरा जा सके.


इसी कड़ी में इस समय द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिक उत्तराखंड वन विभाग की मदत से उत्तराखंड के जंगलों में मौजूद बाँझ और देवदार के पेड़ो में कार्बन सोखने की गुणवत्ता पर जाँच कर रहे हैं ताकी भविष्य में जलवायु परिवर्तन जैसे बड़े संकट से बचा जा सके.
द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. सयैद आरिफ वली के मुताबिक दुनियाभर के 200 देशों ने 2030 तक कार्बन उत्सृजन में कमी लाने का समझौता किया है,जिसके तहत भारत के हिमालयी जंगलों में भी इसका शोध किया जा रहा है.
वैज्ञानिकों के अनुसार भारत के हिमालयी क्षेत्रों के घने वनों में कार्बन सोखने की क्षमता काफ़ी अधिक है इसलिए इन क्षेत्रों में अधिक शोध की अवश्यकता है.


आपको बता दें की घने जंगलों के क्षेत्रफल के मामले में अरुणाचल प्रदेश के बाद उत्तराखंड दूसरे स्थान पर है जहाँ का कुल वन्य क्षेत्रफल 4. 22 लाख वर्ग किमी अधिक घने जंगलों से घिरा है और इन जंगलों में कार्बन सोखने वाले पेड़ों की संख्या ज्यादा है जिनमें बाँझ और देवदार भी शामिल हैं

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